सोनीपत मिशन रोड जैन मंदिर
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एक दृष्टि में

  • नाम
    श्री 1008 दिगम्बर जैन मंदिर, सोनीपत मंडी
  • निर्माण वर्ष
    गर्भगृह 80 वर्ष प्राचीन है
  • स्थान
    मिशन रोड, सोनीपत, हरियाणा
  • मंदिर समय सारिणी
    सुबह 6 बजे से रात्रि 8 बजे तक
मंदिर जी का परिचय
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श्री 1008 दिगम्बर जैन मंदिर जो की सोनीपत मंडी में स्थित है। मंदिर जी का निर्माण आज से 80 वर्ष पूर्व एक चैत्यालय के रूप में किया गया था। समय के साथ चैत्यालय पुराना एवं अस्वस्थ अवस्था में होने के कारण, जैन समाज ने प्राचीन चैत्यालय के स्थान पर नवीन मंदिर जी का निर्माण करने का निर्णय लिया। वर्ष 2017 से ही प्राचीन जिनालय को गिराकर दो मंजिला नवीन जिनालय का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

मंदिर जी का परिसर (3200 वर्गगज क्षेत्रफल) में है, जिसमे एक जैन धर्मशाला भी है। इसलिए सभी प्राचीन प्रतिमाओं को कुछ समय के लिए धर्मशाला के हॉल में एक वेदी का निर्माण करके विराजमान किया गया है। वेदी की मूल प्रतिमा श्री 1008 शांतिनाथ भगवान जी की है जो अति प्राचीन है। मूल प्रतिमा को मिलाकर कुल सत्रह प्रतिमाएँ वेदी में विराजमान है। पहले हॉल में क्षेत्रफल कम था, जिस कारण दर्शन करने आए श्रद्धालुओं को कठिनाई का सामना करना पढ़ रहा था। बाद में हॉल के क्षेत्रफल को बड़ा कर दिया गया, जिससे दर्शन करने में श्रावको को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। हॉल में ही शास्त्र संग्रहालय बना है, जिसमें प्राचीन जैन ग्रंथो को सुरक्षित रूप से रखा गया है।

पुराने चैत्यालय में तीन वेदिया स्थापित थी। इसलिए नवीन मंदिर जी के गर्भगृह में भी तीन वेदियों का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें दो वेदिया श्री शांतिनाथ भगवान एवं एक वेदी श्री पार्श्वनाथ भगवान जी की है। नवीन जिनालय में श्री अरहनाथ भगवान, श्री शांतिनाथ भगवान एवं कुंथुनाथ भगवान जी की तीन खड्गासन प्रतिमाएँ स्थापित की जाएगी। जो भक्तजन सीढ़िया चढ़ने में असमर्थ है, उनके लिए लिफ्ट का प्रबंध भी मंदिर जी में किया जा रहा है। मंदिर जी में पहले शिखर की ऊँचाई 81 फीट थी, लेकिन अब जो नवीन शिखर बन रहे है, उनकी ऊँचाई 85 फीट रखी गई है। नवीन मंदिर जी के बाहर 41 फुट विशाल मानस्तंभ का निर्माण किया गया है। मंदिर परिसर में ही ध्यान केंद्र निर्मित है। प्रतिमाओं के अभिषेक में उपयोग होने वाले शुद्ध जल के लिए, मंदिर परिसर में ही कुएं का निर्माण किया गया है।

क्षेत्र में समय-समय पर जैन मुनि महाराज का आगमन हुआ है। मंदिर जी में सर्वप्रथम वर्ष 1978 को आर्यिका कौशल माता जी का चातुर्मास हुआ, उनके पश्चात आचार्य श्री अमृत सागर जी महाराज का दो बार मंदिर जी में चातुर्मास हो चुका है। मंदिर जी में दो बार परमपूज्य आचार्य श्री 108 गुप्तिसागर जी महाराज का आगमन हुआ है, उनके सानिध्य में दो बार मंदिर जी का पंचकल्याणक हुआ है। महाराज जी के द्वारा प्रथम पंचकल्याणक वर्ष 1996 में एवं अन्य पंचकल्याणक वर्ष 2002 में हुआ है।


जैन समाज एवं सुविधाए

सोनीपत मंडी में जैन समाज की संख्या तीस से चालीस परिवारों तक की है। जब से क्षेत्र में मंदिर जी का पुनः निर्माण किया जा रहा है, तब से इन परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी काफी बढ़त हुई है। सभी जैन परिवार मिलकर मंदिर जी की गतिविधियो में बड़े प्रेमभाव से हिस्सा लेते है। श्री दिगम्बर जैन मंदिर समिति द्वारा मंदिर जी में बाहर से दर्शन करने आने वाले यात्रियों के लिए पंद्रह कमरे की व्यवस्था है। क्षेत्र में आने वाले मुनि महाराज जी के लिए त्यागी भवन का निर्माण भी जैन समाज द्वारा किया गया है। मंदिर समिति द्वारा पंद्रह से बीस वर्ष पहले से चली आ रही आयुर्वेदिक औषधालय की व्यवस्था की गई है। औषधालय में नाम मात्र शुल्क पर चिकित्सा उपलब्ध करवाई जाती है।


क्षेत्र के बारे में

सोनीपत भारत के हरियाणा राज्य में स्थित एक जिला है। सोनीपत नाम संस्कृत शब्द से अपनाया गया है जिसका अर्थ सुवर्णप्रस्थ (सोने की जगह) है। नई दिल्ली से उत्तर में 43 किमी दूर स्थित इस नगर की स्थापना संभवतः लगभग 1500 ई.पू. में आरंभिक आर्यों ने की थी। सोनीपत ऐतिहासिक रूप से प्रमुख घटनाओं का साक्षात्कार करने के लिए अभिज्ञान है। यहां तीन सोनीपत युद्ध हुए थे, जिनमें मुघल साम्राज्य और इस्लामी सुलतानों के बीच महत्वपूर्ण युद्ध हुए थे। सोनीपत की स्थिति ने इसे एक महत्वपूर्ण इतिहासिक स्थान बना दिया है। सोनीपत जनपद का एक प्रमुख नगर है और यह राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। हरियाणा राज्य के अनेक सरकारी और निजी क्षेत्र के दफ्तर और संस्थान यहां स्थित हैं। यमुना नदी के तट पर यह शहर फला-फूला, जो अब 15 किमी पूर्व की ओर स्थानांतरित हो गया है। सोनीपत ज़िला एक मैदानी इलाक़ा है। जिनके 83 प्रतिशत हिस्से में खेती होती है। गेहूँ और चावल प्रमुख फ़सलें है, अन्य फ़सलों में ज्वार, दलहन, गन्ना, बाजरा, तिलहन और सब्ज़ियां शामिल हैं। सोनीपत के आस-पास कई सांस्कृतिक स्थल हैं, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यहां अनेक मंदिर, गुरुद्वारे और ऐतिहासिक स्थल हैं जो आकर्षक हैं। सोनीपत क्षेत्र में धारोहरिक मौजूदगी है जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। यहां कई पुरातात्विक स्थल और संरक्षित क्षेत्र हैं जो इतिहास प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।


समिति

श्री 1008 दिगम्बर जैन मंदिर जी के सुचारू संचालन हेतु श्री दिगम्बर जैन मंदिर समिति का निर्माण किया गया है। समिति में कार्यरत सदस्य इस प्रकार है -

महामंत्री - श्री जय प्रकाश जैन जी


नक्शा