सर्वोदय तीर्थ धारूहेड़ा
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एक दृष्टि में

  • नाम
    श्री 1008 शान्तिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र सर्वोदय तीर्थ, धारूहेड़ा
  • निर्माण वर्ष
    मंदिर जी में प्रथम पंचकल्याणक सन् 2017 में हुआ
  • स्थान
    दिल्ली-जयपुर हाईवे, रेवाड़ी, धारूहेड़ा, हरियाणा
  • मंदिर समय सारिणी
    सुबह 6 बजे से रात्रि 8 बजे तक
मंदिर जी का परिचय
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वर्ष 2011 की बात है जब हस्तिनापुर मंदिर जी में तीन जैन खड्गासन प्रतिमाओं का पंचकल्याणक आर्यिका 105 ज्ञानमती माता जी के सानिध्य में हुआ था। उस समय श्री राजकुमार जैन सौ धर्म इन्द्र बने हुए थे। राजकुमार जी ने ज्ञानमती माता जी से कहा की वह धारूहेड़ा में जैन साधु-महाराज जी के लिए निर्लय भवन का निर्माण करना चाहते है ताकि जब भी महाराज जी का आगमन क्षेत्र पर हो तो उनके विश्राम के लिए शुद्ध व्यवस्था क्षेत्र में उपलब्ध हो सके। अतः उन्होंने श्री 1008 शान्तिनाथ भगवान जी की प्रतिमा को आर्यिका 105 ज्ञानमती माता जी की प्रेरणा से प्रतिष्ठित करवाकर सर्वोदय तीर्थ में लाकर मंदिर जी के गर्भगृह में विराजमान कर दिया।

सन् 2017 में पंचकल्याणक के समय चौबीस जैन परिवारों की सहायता से रत्नमय चौबीसी को विराजमान किया गया। मंदिर जी में हुमंचा पद्मावती माता जी का भवन निर्मित है, जहाँ कर्नाटक के हुमंचा की तरह पद्मावती माता जी के साथ भगवान पार्श्वनाथ जी की प्रतिमा विराजमान है। सन् 2017 से 2018 के बीच श्री वीरेन्द्र हेगडे द्वारा हुमंचा पद्मावती माता जी की वेदी में पार्श्वनाथ भगवान जी की प्रतिमा को स्थापित किया गया। माता पद्मावती जी की यह वेदी उत्तर भारत की पहली पद्मावती माता जी की वेदी होगी जिसकी परिक्रमा का मार्ग गर्भगृह में बना हुआ है। अधिकतम मंदिरों में परिक्रमा बाहर की ओर बनी होती है। प्रत्येक सप्ताह शुक्रवार एवं रविवार के दिन माता जी का शृंगार एवं अभिषेक होता है। यहाँ पर श्रावक दूर-दूर से प्रतिमा जी के दर्शन करने आते है। मंदिर जी में अब तक आचार्य श्री 108 तरुणसागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 विशद सागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज एवं श्री 108 विरागसागर जी महाराज का आगमन हुआ है। वर्तमान समय में मंदिर जी में अष्टधातु की 1008 जैन प्रतिमाओं का सहस्त्रकूट जिनालय, शिखर पर चौबीसी तथा प्रांगण में भगवान शान्तिनाथ जी की इक्कीस फुट ऊँची प्रतिमा का निर्माण कार्य चल रहा है। मंदिर जी में प्रतिदिन दूर के क्षेत्रों से लोग आकर दर्शन करते है।

रत्नमय चौबीसी का निर्माण

मंदिर जी में वर्ष के 365 दिन शान्ति विधान किया जाता है। एक दिन श्री प्रद्युम्न जैन जी प्रतिमा के जलाभिषेक के बाद शान्ति विधान कर रहे थे। उस समय मंदिर जी में चौबीसी विराजमान नहीं थी। तीन जैन महिलाएं प्रद्युम्न जी के पास आकर बैठ गई। तीनों महिलाओं ने प्रद्युम्न जी से तीन जैन प्रतिमाओं को मंदिर जी में विराजमान करने को कहाँ। उन्होंने प्रतिमाओं के लिए अपने कीमती आभूषण उतारकर प्रद्युम्न जी को दे दिए और कहाँ यदि और धनराशि की आवश्यकता हो तो वो भी उपलब्ध हो जाएगी। लेकिन प्रद्युम्न जी ने उनसे कहाँ की यदि आपके परिवार की अनुमति हो तभी मैं ये आभूषण आपसे ले सकता हूँ। वे महिलाएं अपने परिवार के सदस्यों की अनुमति पाकर आभूषण मंदिर जी में दान करने को तैयार हो गई। लेकिन प्रद्युम्न जी अभी भी आभूषण लेने को मान नहीं रहे थे, अंत में महिलाओं ने मंदिर जी में चौबीसी के निर्माण करने को कहाँ। इसके लिए चौबीस जैन परिवारों का सहयोग पाकर रत्नमय चौबीसी का निर्माण किया गया।


जैन समाज एवं सुविधाए

दरूहेड़ा में सौ से अधिक जैन परिवारों का समाज है। जैन समाज द्वारा ही मंदिर जी का संचालन किया जाता है। क्षेत्र में समय-समय पर जैन साधु महाराज का आगमन होता रहता है। जैन साधु महाराज के लिए त्यागी भवन का निर्माण किया गया है। यदि कोई यात्री मंदिर जी में संपर्क करके आता है तो उसके लिए रुकने की व्यवस्था जैन समाज द्वारा निर्मित धर्मशाला में की जाती है। जैन समाज द्वारा निर्मित जैन स्कूल में पाँचवी कक्षा तक छात्रों को शिक्षा दी जाती है।


क्षेत्र के बारे में

धारूहेड़ा भारत के हरियाणा राज्य के रेवाड़ी शहर से सिर्फ 19 किमी की दूरी पर स्थित एक जनगणना शहर है। धारूहेड़ा दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के अंतर्गत आता है और यह रेवाड़ी जिले का एक बड़ा औद्योगिक केंद्र है। धारूहेड़ा गुरुग्राम और नई दिल्ली का नया विकास गलियारा भी है। यह इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से केवल एक घंटे की ड्राइव पर है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग 48 के माध्यम से राजस्थान को राजधानी नई दिल्ली से जोड़ता है। यह अपने स्थान के कारण उद्योगपतियों, निवेशकों और रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए एक प्रमुख पसंद है। 2011 की भारत की जनगणना के अनुसार धारूहेड़ा की जनसंख्या 30,344 थी। 2011 तक पुरुषों की जनसंख्या 54.09% और महिलाओं की संख्या 45.91% थी। धारूहेड़ा की औसत साक्षरता दर 83.18% थी, जो राज्य के औसत 75.55% और राष्ट्रीय औसत 74.04% से अधिक थी।


समिति

मंदिर जी के सुचारु रूप से संचालन के लिए समिति का निर्माण किया गया है। समिति में कार्यरत सदस्य इस प्रकार है -

संस्थापक - श्री राजकुमार जैन

संरक्षक - श्री वीरेन्द्र हेगडे


नक्शा