मंदिर जी का परिचय
श्री 1008 महावीर दिगम्बर जैन मंदिर पलवल शहर से पच्चीस किलोमीटर की दूरी पर बंचारी गांव में स्थित है। मंदिर जी का गर्भगृह 100 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। बताया जाता है कि मंदिर जी के निर्माण से पूर्व क्षेत्र पर अन्य कोई जैन मंदिर नहीं था। उस समय जैन समाज के भी पच्चास से अधिक घर हुआ करते थे इसलिए क्षेत्र पर जैन मंदिर जी का निर्माण करवाया गया। मंदिर जी के निर्माण में सहयोग बंचारी से छत्तीस किलोमीटर की दूरी पर जुरहरा क्षेत्र के जैन समाज का रहा है, जो प्राचीन मेवात का हिस्सा था किन्तु वर्तमान में राजस्थान का हिस्सा हो गया है। जुरहरा जैन समाज के प्रयास से एवं जुरहरा निवासी श्री मूलचन्द जैन जी की प्रेरणा से मंदिर जी का निर्माण किया गया है। मंदिर जी में मूलतः एक वेदी है जिसमें मूलनायक प्रतिमा श्री 1008 महावीर भगवान जी की है। यह प्रतिमा 100 वर्ष से भी अधिक प्राचीन अर्थात मंदिर जी के निर्माण के समय की विराजमान है। श्री महावीर भगवान जी की प्रतिमा के साथ में ही श्री शान्तिनाथ भगवान जी की सफेद पाषाण की प्रतिमा एवं श्री पार्श्वनाथ भगवान जी की पीतल से निर्मित प्रतिमा विराजमान है। पहले वेदी में श्री पार्श्वनाथ भगवान जी की अष्टधातु से निर्मित एक प्रतिमा विराजमान हुआ करती थी जो क्षेत्र पर अधिक जैन परिवार एवं मंदिर जी में अधिक सुरक्षा का प्रबंध न होने के कारण मंदिर जी से प्रतिमा चोरी हो गई थी। बाद में जैन समाज द्वारा श्री पार्श्वनाथ भगवान जी की पीतल से निर्मित प्रतिमा जी को वेदी में विराजमान किया गया। मंदिर जी में पूजा-प्रक्षाल स्थानीय जैन निवासी श्री विष्णु जैन जी के द्वारा ही किया जाता है।
जैन समाज एवं सुविधाए
बंचारी में जैन समाज का केवल एक ही परिवार है, जिसके द्वारा ही मंदिर जी का संचालन किया जाता है। मंदिर जी के साथ में ही एक जैन धर्मशाला बनी हुई है, जहाँ महाराज जी के आने पर रुकने की व्यवस्था की जाती है। यदि कोई यात्री मंदिर जी में किसी अन्य क्षेत्र से दर्शन करने आता है तो वे चाहे तो धर्मशाला में रूक सकते है।
पलवल क्षेत्र के बारे में
पलवल भारत के हरियाणा राज्य का एक मुख्य जिला है। यह भारत की राजधानी दिल्ली से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पलवल के साथ में हरियाणा के गुरुग्राम एवं फरीदाबाद अन्य दो राज्य मिलते है। इतिहास की बात करें तो पलवल भारत की आज़ादी में अपना अहम योगदान रखता है। यहाँ महात्मा गाँधी जी की पहली राजनीतिक गिरफ्तारी हुई थी। महात्मा गाँधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी के साथ आज़ादी की लड़ाई में पलवल के स्वतंत्रता सेनानियों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था। महात्मा गाँधी जी के साथ पलवल के लाला गोबिंदराम बेधड़क, दीपचंद सत्याग्रही, लक्ष्मीनारायण, लछमन दास बंसल, योगेंद्र पाल भारती, लाला भनुआमल मंगला जी ने आज़ादी की लड़ाई में सहयोग किया था। उन्होंने गांधी जी के साथ जेल यात्राएँ भी कीं। पलवल यहाँ पर स्थित बाबा उदास मंदिर, पंचवटी मंदिर, पाण्डव वन, राजा नाहर सिंह किला तथा सैयद शरीफ की दरगाह के लिए दर्शनार्थियों में प्रसिद्ध है।
समिति
बंचारी में जैन समाज केवल एक परिवार का ही है इसलिए मंदिर जी के सुचारु रूप से संचालन के लिए समिति का निर्माण न करके जैन परिवार द्वारा ही मंदिर जी का संचालन किया जाता है। समिति में कार्यरत सदस्य इस प्रकार है-
सदस्य - श्री विष्णु जैन, श्री दीपक जैन












