खंडेलवाल दिगम्बर बड़ा जैन मंदिर परिचय
राजस्थान के जिला भीलवाड़ा में जहाजपुर कस्बे में स्थित स्वस्तिधाम अतिशय क्षेत्र से लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित है श्री 1008 नेमिनाथ खंडेलवाल दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर जी। यह मंदिर जी जहाजपुर के सदर बाजार की गलियों में स्थित है। यहाँ तक पहुँचने के लिए सदर बाजार की गलियों से होते हुए आना होता है। मार्ग थोड़ा भीड़ भाड़ वाला है तो आप अपने वाहन को जहाजपुर बस स्टैंड चौंक के पास पार्किंग में खड़ा कर सकते है। लगभग 500 मीटर पैदल चलकर हम मंदिर जी तक पहुँचते है। मंदिर जी में विराजमान है श्री 1008 नेमिनाथ भगवान जी की चतुर्थकालीन मूल प्रतिमा। मंदिर जी में मूल प्रतिमा को मिलकर 100 से भी अधिक प्रतिमाएँ स्थापित है जो चतुर्थकालीन है। मंदिर जी में श्री 1008 शांतिनाथ भगवान जी की प्रतिमा स्थापित है जिसके सीने पर स्वास्तिक तथा नाभि पर ॐ का चिन्ह दिखाई पड़ता है। जहाजपुर लगभग 20,000 आबादी वाला क्षेत्र है जहाँ 40 से 45 जैन परिवार है। जहाजपुर में प्राचीन दुर्ग बना हुआ जिसका निर्माण महान मौर्य सम्राट अशोक के पौत्र संप्रति द्वारा किया गया था। बाद में महावीर महाराणा कुम्भा ने पुनः निर्माण कराया था। कुंभलगढ़ दुर्ग में 350 से अधिक मंदिर है, जिनमें से 300 मंदिर जैन मंदिर है। सन् 1984 से इस पावन क्षेत्र पर प्रतिमाओं का प्रकट होना प्रारम्भ हुआ। आज भी कई बार चाहे किसी हिन्दू भाई का घर हो या मुस्लिम का प्रतिमा का प्रकट होना देखा गया है। यहाँ से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित स्वस्ति धाम अतिशय क्षेत्र पर विराजमान श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ भगवान जी की प्रतिमा भी यही से प्राप्त हुई थी।
सुविधाएं एवं धर्मशाला
मंदिर जी से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, स्वस्तिधाम अतिशय क्षेत्र जहाँ पर स्थित है 108 कमरों वाली जैन धर्मशाला। धर्मशाला में डीलक्स एवं सूपर डीलक्स दोनों सुविधाओं के साथ कमरें उपलब्ध है। स्नान में गर्म पानी के लिए गीजर की व्यवस्था भी बनी हुई है। धर्मशाला में एक बड़ा रसोईघर बना हुआ है, जिसे तुष्टि पुष्टि भोजनशाला के नाम से जाना जाता है। भोजनशाला में सात्विक भोजन बनाया जाता है। किसी बड़े होटल की भाँति ही धर्मशाला में सुविधाएँ उपलब्ध है। बाहर से आने वाले यात्रिओं के लिए पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है।
भीलवाड़ा क्षेत्र के बारे में
भीलवाड़ा को टेक्सटाइल सिटी के नाम से भी जाना जाता है। भीलवाड़ा में तैयार कपड़ा पुरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध है। भीलवाड़ा के पूर्व में जिला बूंदी तथा जिला टोंक, पश्चिम में चितौड़गढ़, उत्तर में अजमेर तथा दक्षिण में जिला राजसमन्द स्थित है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भीलवाड़ा लगभग 10,455 किमी² है। मान्यता है की यहाँ भील जाति के लोग रहते थे, जिसके कारण इसका नाम भीलवाड़ा रखा गया। एक मतानुसार बताया जाता है, यहाँ मेवाड़ की टेक्सटाइल स्थापित की गई थी जिसमे भीलाड़ी नामक सिक्कों को बनाया जाता था, जिससे इसका नाम भीलवाड़ा पड़ गया। यहाँ से अभ्रक को निकालकर पुरे विश्व में निर्यात किया जाता है। भीलवाड़ा में स्थान-स्थान पर नदियाँ, झरने तथा बाँध देखने को मिलते है। भीलवाड़ा में बनास, बेड़च तथा मेनाली तीनो नदियों का संगम देखने को मिलता है। जहाजपुर के दुर्ग का निर्माण मूलत: महान मौर्य सम्राट अशोक के पौत्र सम्प्रति ने किया था, जो जैन धर्म का अनुयायी थे। यहाँ पर दो प्रसिद्ध जैन मंदिर है।






