मंदिर जी का परिचय
श्री 1008 चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन प्राचीन अतिशय क्षेत्र, हरियाणा के जिले गुरुग्राम से 4.5 किलोमीटर व दिल्ली जयपुर हाइवे से 1.5 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। मंदिर जी का निर्माण आज से 150 वर्ष पूर्व पालमगांव के एक पटवारी द्वारा करवाया गया था। पटवारी के बारे में बताया जाता है कि उन्होंने पालमगांव, झाड़सा व बादशाहपुर में भी दिगम्बर जैन मंदिरों का निर्माण करवाया था।
वर्ष 2005 में परम पूजनीय श्री 108 बाहुबली महाराज जी के द्वारा झाड़सा मंदिर जी को अतिशय क्षेत्र घोषित किया गया। वर्ष 2005 में ही मंदिर जी की वेदी प्रतिष्ठा पुनः की गई। पहले मंदिर जी में केवल एक वेदी हुआ करती थी। लेकिन वेदी प्रतिष्ठा के बाद अन्य दो वेदियो का निर्माण जैन समाज द्वारा करवाया गया। वर्ष 2007 में एक बार फिर आचार्य श्री 108 बाहुबली महाराज जी का आगमन क्षेत्र पर हुआ। महाराज की अनुप्रेरणा से एवं स्थनीय समाज के प्रयास से मंदिर जी में पंचकल्याणक का आयोजन संपन्न हुआ।
मंदिर जी में कुल तीन वेदिया स्थापित है। मंदिर जी की मूल वेदी, मंदिर जी की सबसे प्राचीन एवं अतिशयकारी वेदी है। मूल वेदी में श्री 1008 चन्द्रप्रभु भगवान जी की 500 वर्ष से भी अधिक प्राचीन प्रतिमा मूलनायक के रूप में विराजमान है। क्षेत्र में भगवान चन्द्रप्रभु जी की इस प्रतिमा का बहुत अतिशय है। इसी वेदी में श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ भगवान, श्री 1008 शान्तिनाथ भगवान एवं श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान जी की प्रतिमा भी विराजमान है। ये प्रतिमाएँ भी लगभग 500 वर्ष से अधिक प्राचीन एवं अतिशयकारी है। मंदिर जी की दूसरी वेदी में मूलनायक प्रतिमा प्रथम तीर्थंकर श्री 1008 आदिनाथ भगवान जी की है। इस वेदी का निर्माण स्वर्गीय श्री राम सिंह जैन (फाड़सा निवासी, जिला हिसार) जी की स्मृति में उनकी धर्मपत्नी श्रीमति ज्ञान माला जैन एवं उनके सुपुत्र श्री कंवर सेन व राकेश जैन द्वारा अप्रैल 2005 में करवाया गया है। मंदिर जी की तीसरी वेदी में मूलनायक प्रतिमा श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान जी की है। मंदिर जी के गर्भगृह में जैन तीर्थंकरो एवं जैन कथाओं का सुंदर चित्रण किया गया है। मंदिर जी में ही विशाल मानस्तंभ का निर्माण किया गया है।
मंदिर जी से थोड़ी दूरी पर मेदान्ता (द मेडिसिटी) हॉस्पिटल निर्मित है। यहाँ लोग दूर-दूर के क्षेत्रों से ईलाज करवाने आते है। जो श्रावक गंभीर हालत में होते है वो भी भगवान की शरण में आकर ठीक हो जाते है। स्थानीय जैन समाज द्वारा बताया जाता है की वे मंदिर जी में आकर शान्तिधारा अवश्य करवाते है। यह मंदिर जी का अतिशय ही है कि गंभीर हालत वाले मरीज भी क्षेत्र में आकर ठीक हो जाते है। मंदिर जी की समिति द्वारा ही होम्योपैथिक धर्मार्थ औषधालय चलाया जाता है। जहाँ निःशुल्क ही सभी वर्ग के लोगो को दवाई उपलब्ध करवाई जाती है।
जैन समाज एवं सुविधाए
वर्तमान में गुरुग्राम हर प्रकार की सुविधाओं से युक्त एक इंडस्ट्रियल हब बन चुका है, जहाँ भिन्न-भिन्न समुदाय के लोग एक साथ रहते है। गुरुग्राम में लगभग सात सौ से आठ सौ जैन परिवारों का समाज है। क्षेत्र में कई जैन मंदिर स्थापित है, प्रत्येक मंदिर जी के लिए समिति का निर्माण किया गया है। गुरुग्राम के झाड़सा गाँव में स्थित श्री 1008 चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन प्राचीन अतिशय क्षेत्र स्थानीय ही नहीं बल्कि दूर-दूर के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। मंदिर जी का संचालन स्थानीय जैन समाज द्वारा किया जाता है। मंदिर जी में आने वाले श्रावकों के लिए सभी प्रकार की सुविधाए मंदिर समिति द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है। यदि कोई यात्री दूर के क्षेत्र से मंदिर जी में दर्शन करने आता है तो उनके लिए रुकने की व्यवस्था मंदिर जी के पास ही में स्थित जैन धर्मशाला में उपलब्ध करवाई जाती है। धर्मशाला से मंदिर की दूरी लगभग 1.5 किलोमीटर है। मंदिर अंदर गलियों में स्थित है इसलिए यहाँ पर मंदिर जी तक निःशुल्क ई-रिक्शा की व्यवस्था भी बनी हुई है। मंदिर की समिति द्वारा भी यही सलाह दी जाती है की आप अपने वाहनों को धर्मशाला में ही पार्क करें और निशुल्क ई रिक्शा या अपनी सुविधा अनुसार आप पैदल भी मंदिर जी तक जा सकते है। धर्मशाला में ही होम्योपैथिक औषधालय का भी निर्माण किया गया है जहाँ निःशुल्क ही दवाई उपलब्ध करवाई जाती है।
क्षेत्र के बारे में
गुरुग्राम या गुड़गाँव हरियाणा राज्य का एक नगर है जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से सटा हुआ है। यह दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है और दिल्ली नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) का हिस्सा है। गुरुग्राम एक व्यापारिक, आर्थिक और आधुनिक शहर है जो तेजी से विकसित हो रहा है। यह फरीदाबाद के बाद हरियाणा का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला नगर है। गुरुग्राम दिल्ली के प्रमुख सैटेलाइट नगरों में से एक है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा है। चण्डीगढ़ और मुम्बई के बाद यह भारत का तीसरा सबसे ज्यादा पर-कैपिटा इनकम वाला नगर है। लोकमान्यता अनुसार महाभारत काल में इन्द्रप्रस्थ (वर्तमान दिल्ली) के राजा युधिष्ठिर ने यह ग्राम अपने गुरु द्रोणाचार्य को दिया था। उनके नाम पर ही इसे गुरुग्राम कहा जाने लगा, जो कालांतर में बदलकर गुड़गांव हो गया था। गुरुग्राम यह नगर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके साथ ही गुरुग्राम एक महत्वपूर्ण तांत्रिक क्षेत्र भी है जिसमें बड़ी IT कंपनियाँ,बैंक,वित्तीय संस्थान आदि हैं। गुरुग्राम का आधुनिक शहरी विकास आधुनिक आवासीय परियोजनाओं,शॉपिंग मॉल,रेस्तरां,होटल और आर्ट-कला संस्थानों के साथ-साथ एक सामाजिक और सांस्कृतिक हब के रूप में भी विकसित हो रहा है। गुरुग्राम के पास कई ऐतिहासिक स्थल हैं- जैसे की शेषधरी, सुल्तानपुर जील, और सुल्तानपुर नेशनल पार्क जो प्राकृतिक सौंदर्य को अपने आप में समेटे हैं। समाज के लिए गुरुग्राम के पास अच्छे शिक्षा संस्थान,अस्पताल अन्य सुविधाएं हैं। इसके अलावा शहर में विभिन्न धार्मिक स्थल भी हैं। इसके साथ ही गुरुग्राम का सांस्कृतिक जीवन भी विविधता से भरा हुआ है। यहाँ कई आर्ट गैलरी, नृत्य और संगीत के केंद्र हैं जो शहर की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करते हैं। सम्पूर्ण रूप से गुरुग्राम एक व्यापारिक, तकनीकी, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से एक बहुमुखी शहर है जो भारतीय राज्य हरियाणा में स्थित है।
समिति
मंदिर जी के सुचारू संचालन हेतु श्री दिगम्बर जैन मंदिर समिति का निर्माण किया गया है। समिति में कार्यरत सदस्य इस प्रकार है -
प्रधान - श्री राकेश जैन
उप प्रधान - श्री जय प्रकाश जैन
उप प्रधान - श्री देवेन्द्र कुमार जैन
कोषाध्यक्ष - श्री सुरेन्द्र कुमार जैन

















