जनकुरी बी1 ब्लॉक जैन मंदिर

एक दृष्टि में

  • नाम
    श्री दिगंबर जैन मंदिर, जनकुरी
  • निर्माण वर्ष
    मंदिर जी की स्थापना 1978 के दशक में हुई थी
  • स्थान
    श्री दिगंबर जैन मंदिर, बी1 ब्लॉक, जनकुरी
  • मंदिर समय सारिणी
    सुबह 6 बजे से 12 बजे तक, सांय 5 बजे से 7 बजे तक
मंदिर जी का परिचय
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श्री दिगंबर जैन मंदिर जी दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र के बी1 ब्लॉक में स्थित है। यह मंदिर जी न केवल जनकपुरी में रहा रहे जैन समुदाय के धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। मंदिर जी की स्थापना 1970 के दशक में हुई, जब जनकपुरी एक नव विकसित आवासीय क्षेत्र था। उस समय, जनकपुरी क्षेत्र में रहने वाले जैन परिवारों को दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता था। इस समस्या को समझते हुए, जैन समुदाय के कुछ परिवारों ने एक ऐसे स्थल की आवश्यकता महसूस की, जहाँ वे अपनी पूजा-अर्चना कर सकें।

इस दिशा में पहला कदम "जैन सभा जनकपुरी" का गठन था, जिसे श्री राकेश जैन और अन्य समाजसेवियों ने मिलकर स्थापित किया। भूमि अधिग्रहण और मंदिर जी निर्माण की प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण थी। प्रारंभ में, राकेश जैन के घर पर एक अस्थायी चैत्यालय स्थापित किया गया, जहाँ जयपुर के शिल्पकारों द्वारा एक प्रतिमा तैयार कर, तब दिल्ली के अशोक विहार में श्री 108 विद्यानंद जी महाराज के सनिधि में चल रहे पांच कल्याणक के अवसर पर प्रतिष्ठित कराके, यहाँ चैत्यालय में विराजमान किया गया। ऐसे यहाँ पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई। इस दौरान, श्री विद्यानंद जी महाराज कुछ दिनों के लिए यहाँ पधारे, और समाज की गहरी धर्म भावना देखकर उन्होंने मार्गदर्शन भी दिया। फिर समाज के सामूहिक प्रयासों और श्री 108 विद्यानंद जी महाराज जैसे महान संतों के मार्गदर्शन में, इस अस्थायी स्थल से जल्द ही एक नए स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। शुरुआत में, नए स्थान पर भी एक चैत्यालय का निर्माण हुआ, और धीरे-धीरे यह मंदिर का रूप लेते हुए निर्माणाधीन हो गया। अपनी अद्वितीय वास्तुकला, धार्मिक महत्व और सामुदायिक योगदान के कारण, यह मंदिर धर्मप्रेमियों के लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत बन गया है।

मंदिर जी निर्माण धौलपुर के पत्थरों से किया गया है, जो इसे भव्यता और मजबूती प्रदान करते हैं। यह मंदिर जी दो मंजिलों में विभाजित है, जिसके प्रथम तल पर काले पाषाण से निर्मित भगवान पार्श्वनाथ जी की मूल प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा कमलासन पर विराजमान है और इसकी अलौकिक सुंदरता श्रद्धालुओं को मोहित करती है। मंदिर जी में कुल दो वेदियाँ हैं। बुजुर्गों को दर्शन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए समिति द्वारा दूसरी वेदी भूतल पर स्थापित की गई, जहां श्री 1008 महावीर भगवान जी की प्रतिमा विराजमान है। इस वेदी में सफेद पाषाण से निर्मित पद्मासन भगवान महावीर जी की प्रतिमा के साथ-साथ अष्टधातु से बनी भगवान आदिनाथ और भगवान चंद्रप्रभु की प्रतिमाएँ भी विराजमान हैं। इसके अलावा, मंदिर जी की दीवारों पर की गई धार्मिक चित्रकला और नक्काशी इसकी सुंदरता को ओर अधिक बढ़ाती हैं।


धार्मिक अनुष्ठान और प्रमुख उत्सव

श्री दिगंबर जैन मंदिर जी में प्रतिदिन पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा, यहां विशेष जैन पर्वों और उत्सवों का आयोजन भी होता है। दस लक्षण पर्व, महावीर जयंती और क्षमावाणी पर्व (संवत्सरी) जैसे प्रमुख उत्सवों के दौरान मंदिर जी में सैकड़ों श्रद्धालु एकत्र होते हैं। महावीर जयंती के दिन भगवान महावीर की झांकी और विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। क्षमावाणी पर्व के दौरान लोग एक-दूसरे से क्षमा मांगते हैं और अहिंसा के महत्व को दोहराते हैं। यहां श्री महावीर भगवान जी का मोक्ष कल्याणक और श्री पार्श्वनाथ भगवान जी की जयंती एवं मोक्ष कल्याणक बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। इन उत्सवों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी लोग भाग लेते हैं और इसे बड़े धूमधाम से मनाते हैं।

श्री दिगंबर जैन मंदिर जी से जुड़ी कई प्रेरणादायक घटनाएँ भी हैं, जो इसकी आध्यात्मिक शक्ति और प्रभाव को दर्शाती हैं। एक महिला, जो नियमित रूप से मंदिर जी में पूजा करती थीं, साध्वी बनने के लिए प्रेरित हुईं। यह घटना न केवल जैन धर्म की शिक्षाओं की शक्ति को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि यह मंदिर जी किस प्रकार से लोगों को आध्यात्मिक रूप से प्रभावित करता है। मंदिर जी में युवाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। वे न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं, बल्कि सामाजिक सेवा और सामुदायिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।


जैन समाज एवं सुविधाए

श्री दिगंबर जैन मंदिर जनकुरी बी1 ब्लॉक में मिनी मार्केट के सामने, बीएसईएस बिजली कार्यालय और मिशन स्कूल के पास स्थित है। जनकपुरी ईस्ट मेट्रो स्टेशन केवल 10 मिनट की पैदल दूरी पर होने के कारण यह स्थान आसानी से सुलभ है। मंदिर के आसपास का क्षेत्र अपनी हरियाली और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे पूजा और ध्यान के लिए एक आदर्श स्थल बनाता है। मंदिर जी के आसपास के क्षेत्र में लगभग 25 से 30 परिवारों का एक समृद्ध जैन समाज निवास करता है, जो प्रतिदिन दर्शन के लिए मंदिर जी आता है।

मंदिर के सुचारू संचालन के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जो नियमित रूप से विभिन्न सामाजिक कार्यों का आयोजन करती है। समिति द्वारा चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाता है, जिसमें जरूरतमंदों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएँ दी जाती हैं। इसके अतिरिक्त, गरीब और कमजोर वर्गों के लिए भोजन वितरण और दान कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मंदिर शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय है, जहाँ छात्रों को शिक्षा सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधन प्रदान किए जाते हैं। समय-समय पर साधु-महाराज का आगमन भी होता रहता है, और उनके ठहरने के लिए मंदिर में सभी आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित कमरे भी उपलब्ध हैं।


दिल्ली क्षेत्र के बारे में

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली भारत की राजधानी और एक केंद्र-शासित प्रदेश है। भारत की राजधानी होने के कारण केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों- कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय दिल्ली में ही स्थापित हैं। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है, और पुराणों में इसका विशेष महत्व है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं।

दिल्ली का प्राचीनतम उल्लेख महाभारत महापुराण में मिलता है जहाँ इसका उल्लेख प्राचीन इन्द्रप्रस्थ के रूप में किया गया है। इन्द्रप्रस्थ महाभारत काल में पांडवों की राजधानी थी। दिल्ली केवल भारत की राजधानी ही नहीं अपितु यह एक पर्यटन का मुख्य केन्द्र भी है। राजधानी होने के कारण भारत सरकार के अनेक कार्यालय, राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, केन्द्रीय सचिवालय आदि अनेक आधुनिक स्थापत्य के नमूने तो यहाँ देखे ही जा सकते हैं; प्राचीन नगर होने के कारण इसका ऐतिहासिक महत्त्व भी है। पुरातात्विक दृष्टि से पुराना किला, सफदरजंग का मकबरा, जंतर मंतर, क़ुतुब मीनार और लौह स्तंभ जैसे अनेक विश्व प्रसिद्ध निर्माण यहाँ पर आकर्षण का केन्द्र समझे जाते हैं। लगभग सभी धर्मों के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल यहाँ हैं जैसे बिरला मंदिर, कात्यायिनी शक्तिपीठ, लाल जैन मंदिर, बंगला साहब गुरुद्वारा, बहाई मंदिर, अक्षर धाम मंदिर और जामा मस्जिद देश के शहीदों का स्मारक इंडिया गेट, राजपथ पर इसी शहर में निर्मित किया गया है। वर्तमान समय में दिल्ली सम्पूर्ण भारत के व्यापार का मुख्य केंद्र बन चूका है।


समिति

श्री दिगंबर जैन मंदिर जी का प्रबंधन और संचालन "जैन सभा जनकपुरी" समिति द्वारा किया जाता है। समिति के सदस्य मंदिर जी के रख-रखाव, धार्मिक कार्यक्रमों और सामाजिक सेवाओं की योजना बनाते हैं। समिति में कार्यरत सदस्य इस प्रकार है -

प्रधान - श्री गौरव जैन

कोषाध्यक्ष - श्री जितेन्द्र कुमार जैन

उपाध्यक्ष - श्री सुरेंद्र कुमार जैन

सचिव - श्री सुशील कासलीवाल