गुरुग्राम सदर बाजार जैन मंदिर
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एक दृष्टि में

  • नाम
    श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन (बारादरी) मंदिर, जैकमपुरा
  • निर्माण वर्ष
    मंदिर जी का गर्भगृह लगभग 150 वर्ष प्राचीन है
  • स्थान
    जैकमपुरा, सदर बाजार, गुरुग्राम, हरियाणा
  • मंदिर समय सारिणी
    सुबह 6 बजे से रात्रि 8 बजे तक
मंदिर जी का परिचय
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श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जैकमपुरा हरियाणा राज्य के जिला गुरुग्राम में स्थित है। मंदिर जी का निर्माण आज से 150 वर्ष पूर्व जैन समाज द्वारा चैत्यालय के रूप में करवाया गया था। पहले चैत्यालय में बारह दरवाजे बने हुए थे इसलिए मंदिर जी को बारादरी मंदिर जी के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर जी में जैन समाज के द्वारा समय-समय पर निर्माण कार्य किया गया है।

जैन समाज द्वारा वर्ष 1975 में किए गए पंचकल्याणक के समय मंदिर जी में अन्य वेदियो की स्थापना की गई थी। मंदिर जी की मूलवेदी में मूलनायक प्रतिमा श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान जी की है। यह प्रतिमा लगभग 1500 वर्ष प्राचीन है। वेदी में मूलनायक प्रतिमा के साथ श्री 1008 महावीर भगवान, श्री 1008 चन्द्रप्रभु भगवान, श्री 1008 पद्मप्रभु भगवान एवं श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ भगवान जी की प्रतिमा के साथ अन्य जैन प्रतिमाएँ विराजमान है। मंदिर जी की दूसरी वेदी का निर्माण श्री मति मुन्नी देवी धर्मपत्नी लाला मुल्तान सिंह जैन देहली निवासी द्वारा करवाया गया है। वेदी में मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान जी की प्रतिमा बिना नाग फण के है जो 500 वर्ष प्राचीन बताई जाती है साथ ही अष्टधातु से निर्मित चौबीसी विराजमान है। पार्श्वनाथ भगवान जी की ऐसी प्रतिमा के दर्शन बहुत दुर्लभ देखने को मिलते है। मंदिर जी की तीसरी वेदी का निर्माण श्री शिवप्रसाद पारस दास जी द्वारा स्व. श्री ज्वाला प्रसाद जैन और माता श्रीमति माड़ी देवी धर्मपत्नी श्री राम प्रसाद जैन जी की स्मृति में उनके पुत्र द्वारा बनवाई गई है। इस वेदी में भी मूलनायक प्रतिमा श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान जी की है। मंदिर जी की चौथी वेदी में मूलनायक प्रतिमा काले पाषाण की श्री 1008 नेमिनाथ भगवान जी की विराजमान है। मंदिर जी की पाँचवी वेदी में मूलनायक प्रतिमा श्री 1008 श्री कुंथुनाथ भगवान जी की है।

मंदिर जी के नीचे भूगर्भ में रत्नमयी चौबीसी प्रतिमा वेदी विराजमान है। भूगर्भ में माता जिनवाणी जी की वेदी भी विराजमान है। भूगर्भ में श्रावको के लिए एक बड़े हॉल का निर्माण किया गया है। जहाँ बैठकर श्रावक एकांत में स्वाध्याय कर सकते है। कई बार साधु महाराज जी के आने पर हॉल को प्रवचन हॉल के रूप में भी उपयोग किया जाता है। मंदिर जी के साथ में ही जैन धर्मशाला बनी है जिसमें वर्ष 2002-2003 में आचार्य श्री 108 बाहुबली महाराज जी के सानिध्य में धर्मचक्र का निर्माण किया गया था। धर्मशाला में साधु महाराज जी के ठहरने के लिए त्यागी भवन, यात्रियों के लिए उचित कमरे, ऑडिटोरियम हॉल, संस्कृतिक कार्यकर्मो के लिए दो विशाल हॉल एवं चिकित्सा दृष्टि से भगवान पार्श्वनाथ चैरिटेबल मेडिकेयर सेंटर चलाया जाता है। मंदिर जी के प्रति जैन श्रावकों के अतिरिक्त अन्य समाज के लोगो की भी आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर जी में स्थानीय जैन समाज के साथ-साथ दूर के क्षेत्रों से भी लोग आकर पूजा-प्रक्षाल एवं शान्तिधारा करते है।


जैन समाज एवं सुविधाए

वर्तमान में गुरुग्राम हर प्रकार की सुविधाओं से युक्त एक इंडस्ट्रियल हब बन चुका है जहाँ भिन्न-भिन्न समुदाय के लोग एक साथ रहते है। गुरुग्राम में लगभग सात सौ से आठ सौ जैन परिवारों का समाज है। क्षेत्र में कई जैन मंदिर स्थापित है। प्रत्येक मंदिर जी के लिए समिति का निर्माण किया गया है। जैकमपुरा में स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जी में आने वाले श्रावकों की शुद्धता का प्रबंध मंदिर समिति द्वारा किया गया है। यदि कोई यात्री दूर के क्षेत्र से मंदिर जी में दर्शन करने आता है तो उनके लिए रुकने की व्यवस्था भी मंदिर समिति द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है। रुकने की व्यवस्था के रूप में जैन धर्मशाला का निर्माण किया गया है। धर्मशाला में दस कमरों का निर्माण किया गया है। धर्मशाला में मुनि महाराज जी के आने पर उनके प्रवचनो को सुनने के लिए प्रवचन हॉल की सुविधा भी बनी हुई है। महाराज जी के आहार का प्रबंध भी धर्मशाला में ही किया जाता है। धर्मशाला का प्रयोग सामाजिक कार्यक्रमों में भी किया जाता है। धर्मशाला के साथ में ही भगवान पार्श्वनाथ चैरिटेबल मेडिकेयर सेंटर चलाया जाता है। जिसमें होम्योपैथिक, फिजियोथेरेपी सेंटर, आई सेंटर ,डेंटिस्ट, बच्चों के स्पेशल डॉक्टर, स्कीन के डॉक्टर अदि की सुविधा उपलब्ध है।


क्षेत्र के बारे में

गुरुग्राम या गुड़गाँव हरियाणा राज्य का एक नगर है जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से सटा हुआ है। यह फरीदाबाद के बाद हरियाणा का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला नगर है। गुरुग्राम दिल्ली के प्रमुख सैटेलाइट नगरों में से एक है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा है। चण्डीगढ़ और मुम्बई के बाद यह भारत का तीसरा सबसे ज्यादा पर-कैपिटा इनकम वाला नगर है। लोकमान्यता अनुसार महाभारत काल में इन्द्रप्रस्थ (वर्तमान दिल्ली) के राजा युधिष्ठिर ने यह ग्राम अपने गुरु द्रोणाचार्य को दिया था। उनके नाम पर ही इसे गुरुग्राम कहा जाने लगा, जो कालांतर में बदलकर गुड़गांव हो गया था। गुरुग्राम यह नगर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।


समिति

मंदिर जी के सुचारू संचालन हेतु श्री दिगम्बर जैन मंदिर समिति का निर्माण किया गया है। समिति में कार्यरत सदस्य इस प्रकार है -

प्रधान - श्री संदीप जैन

उप प्रधान -श्री विनय जैन

महामंत्री - श्री श्रेयांश जैन

कोषाध्यक्ष - श्री प्रदीप जैन


नक्शा