मंदिर जी का परिचय
श्री 1008 शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर गुप्तिधाम तीर्थक्षेत्र से लगभग तीन किलोमीटर दूर गन्नौर शहर की जैन गली पुरानी मंडी में स्थित है। मंदिर जी का निर्माण आज से लगभग 80 वर्ष पूर्व जैन समाज द्वारा कराया गया था। निर्माण के समय जैन समाज द्वारा मंदिर जी में मूलनायक प्रतिमा के रूप में श्री 1008 शांतिनाथ भगवान जी की लाल पाषाण की प्रतिमा को दिल्ली के दिगम्बर जैन लाल मंदिर से लाकर वेदी में विराजमान किया गया था। भगवान शांतिनाथ जी की यह प्रतिमा चार सौ वर्ष प्राचीन बताई जाती है। मूल वेदी में मूलनायक प्रतिमा के साथ ही अन्य पाषाण एवं अष्ट धातु की जैन तीर्थंकरो की प्रतिमाएँ भी विराजमान है। मंदिर जी में वर्ष 1982 से 1983 में दो अन्य वेदियों का निर्माण किया गया। जिसमें से एक वेदी में श्री आदिनाथ भगवान जी की खड्गासन प्रतिमा एवं दूसरी वेदी में श्री महावीर भगवान जी की पद्मासन प्रतिमा को मूल प्रतिमा के रूप में विराजमान किया गया है। स्थानीय जैन समाज द्वारा बताया जाता है की मंदिर जी की प्राचीन प्रतिमाओं में से एक प्रतिमा को पानीपत तथा एक प्रतिमा को हस्तिनापुर के पास स्थित अतिशय क्षेत्र बेहसुमा दिगम्बर जैन मंदिर जी में विराजमान किया गया है। यह प्रतिमाएँ कौन से सन् में यहाँ से ले जाई गई थी इसका पूर्ण स्पष्टीकरण नहीं है ना ही यह ज्ञात है की ये दोनो प्रतिमाएँ कौन से भगवान जी की थी।
मंदिर जी में वर्तमान समय में आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज के प्रेरणा से तीनो वेदियों एवं वेदियों के ऊपर शिखर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। मंदिर जी की तीनों वेदियों को एक कमरें में अस्थाई रूप से विराजमान किया गया। मंदिर जी में समय-समय पर जैन मुनि महाराज जी का आगमन होता रहता है। मंदिर जी में अब तक श्री धर्मभूषण जी महाराज एवं आचार्य शांतिसागर महाराज जी का चातुर्मास हुआ है। कुछ समय पहले ही क्षेत्र में श्री सुधर्म सागर जी महाराज एवं एलक विज्ञानसागर जी का आगमन हुआ है। मंदिर जी में प्रति रविवार महिला जैन प्रधान श्रीमती सविता जैन जी द्वारा बच्चो को जैन संस्कारो से अवगत कराने हेतु जैन पाठशाला का आयोजन किया जाता है।
प्रतिमा का स्थिर हो जाना
कुछ समय पहले मंदिर जी की वेदियो के नवीकरण हेतु पुराने स्थान से नए स्थान पर प्रतिमाओं को विराजित करना था। सभी प्रतिमाओं को पुरानी वेदी से उठाकर कुछ समय के लिए अस्थाई वेदियो में विराजमान किया गया था। किन्तु जब श्रावक भगवान आदिनाथ जी की प्रतिमा को उठाने लगे तो प्रतिमा जी अचल हो गई। कई लोगो ने मिलकर प्रयास किया लेकिन प्रतिमा जी अपनी जगह से हिली भी नहीं। वहाँ उपस्थित सभी को ऐसा प्रतीत हुआ मानो प्रतिमा स्थिर हो गई हो। उपरांत मंदिर जी की समिति द्वारा मध्य प्रदेश से श्री भगवत छोटे लाल जी एवं उनके दल को बुलाया गया। छोटे लाल जी एवं उनके पुरे दल के कठिन प्रयास के बाद प्रतिमा जी को उठाकर अन्य स्थान पर विराजित किया।
जैन समाज एवं सुविधाए
गन्नौर में लगभग सौ जैन परिवारों का समाज है। जैन परिवारों द्वारा हर प्रकार के सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जाता है। गन्नौर में कुल तीन दिगम्बर जैन मंदिर है जिनमें में से श्री 1008 दिगम्बर जैन गुप्तिसागर तीर्थक्षेत्र गन्नौर जी.टी. रोड पर एवं दो मंदिर गन्नौर शहर में स्थित है। जैन समाज द्वारा मंदिर जी में आने वाले श्रावकों के लिए हर प्रकार की सुविधा का प्रबंध करवाया जाता है ताकि उन्हें दर्शन करने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। जो यात्री किसी दूर के क्षेत्र से गन्नौर शहर में स्थित दिगम्बर जैन मंदिरों के दर्शन करने आते है उनके लिए रुकने की व्यवस्था जैन समाज द्वारा निःशुल्क ही पुरानी मंडी गन्नौर में स्थित जैन धर्मशाला में निर्मित आठ कमरों में की जाती है। क्षेत्र में जैन समाज द्वारा निर्मित सी सी ए एस विद्यामंदिर स्कूल एवं सी सी ए एस जैन गर्ल्स कॉलेज के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध करवाई जाती है। क्षेत्र में जैन मुनि-महाराज जी का भी आगमन समय-समय पर होता रहा है। महाराज जी के आगमन पर विश्राम की व्यवस्था जैन धर्मशाला में निर्मित त्यागी भवन में की जाती है।
क्षेत्र के बारे में
सोनीपत से मात्र बीस किलोमीटर की दुरी पर स्थित है गन्नौर का शहर। यह भारत की राजधानी दिल्ली से 58 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। 2011 की भारत की जनगणना के अनुसार गन्नौर की जनसंख्या पैंतीस हजार थी जिसमें लगभग उनीस हजार पुरुष और सौलह हजार महिलाएं थीं। गन्नौर जी.टी. रोड पर स्थित गुप्ती धाम दिगंबर जैन मन्दिर सोनीपत ही नहीं बल्कि दूर-दूर के क्षेत्रों से दर्शनार्थियों को अपनी और आकर्षित करता है। इसके अलावा गनौर शहर में भी दो दिगम्बर जैन मंदिर स्थित है। जिनमें से एक मंदिर गन्नौर पुरानी मंडी में श्री 1008 शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर व दूसरा गन्नौर मेन बाजार चौक पर श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन प्राचीन मंदिर जी के नाम से स्थित है। राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे के माध्यम से इसकी राष्ट्रीय राजधानी से बेहतरीन कनेक्टिविटी है।
समिति
मंदिर जी के सुचारू संचालन हेतु श्री दिगम्बर जैन मंदिर समिति का निर्माण किया गया है। समिति में कार्यरत सदस्य इस प्रकार है -
प्रधान - श्री सुरेंद्र जैन जी
सचिव - श्री अनिल जैन जी
उप प्रधान - श्री मोहन जैन जी
कोषाध्यक्ष - श्री पदम जैन जी







