बिहारी अतिशय क्षेत्र
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एक दृष्टि में

  • नाम
    श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र बिहारी जी
  • निर्माण वर्ष
    गर्भ गृह लगभग 650 वर्ष प्राचीन / प्रतिमा लगभग 1800 वर्ष प्राचीन
  • स्थान
    बिहारी, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
  • मंदिर समय सारिणी
    प्रात - 5:30 बजे से 11:30 बजे तक, शाम - 5:30 बजे से 8:30 बजे तक
बिहारी मंदिर जी का परिचय
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मन्सूरपुर गांव से सात किलोमीटर दूर तथा उत्तर प्रदेश के जिला मुज़फ्फरनगर से 18 किलोमीटर दूर स्थित है बिहारी क्षेत्र। जहाँ पर निर्मित है अतियंत प्राचीन श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र। बताया जाता है की बिहारी क्षेत्र का सम्बन्ध महाभारत काल से भी रहा है। महाभारत काल में इस क्षेत्र को अनूप शहर के नाम से जाना जाता था। ये वही जगह है जहाँ पर पांडव द्रौपदी को जुए में हार गए थे जिसके पश्चात यह क्षेत्र बु-हारी के नाम से प्रसिद्ध हुआ और वर्तमान समय में बुहारी से तबदील होकर बिहारी के नाम से जाना जाने लगा। कहा जाता है की महाभारत के समय में पांडव, हस्तिनापुर से बिहारी आने के लिए एक गुप्त गुफा का प्रयोग करते थे। बिहारी ग्राम में आज भी एक तालाब मौजूद है जिसे कंची का तालाब कहा जाता है जहाँ पांडव स्नान करके पूजा अर्चना करते थे।

बात मुगलकाल की है जब जैन मंदिरों को नष्ट किया जा रहा था तब जैन समाज के लोगों ने प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने के लिए, सभी प्रतिमाओं को तालाब में छिपा दिया था। सम्वत 1500 ई. में तालब से प्रतिमाओं को निकाल कर वर्तमान मंदिर जी में स्थापित किया गया। तत्पश्चात् स्थानीय लोगों का यह मानना है की तालाब में नहाने से सभी प्रकार के चर्म रोग दूर होते है। वर्तमान में मंदिर जी में मूल प्रतिमा श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान जी की है जो लगभग 1800 वर्ष प्राचीन बताई जाती है। मूल वेदी में ग्रेनाईट पाषाण की शिला पर भी 26 प्रतिमाएँ श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान की है। जो की दुर्लभ एवं अतिप्राचीन नजर आती है। मंदिर जी की मूल वेदी में कुल 21 प्रतिमाएँ विराजमान है, जो पाषाण एवं अष्ट धातु से बनी है। जिन्हे देखकर मन को अत्यंत शांति का अनुभव होता है। मंदिर जी में माता पद्मावती जी एवं उनके ही साथ में क्षेत्रपाल जी की वेदी भी विराजमान है।


आस्था के गहनों में छुपे मंदिर जी के अतिशय
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एक वाक्य अनुसार 15 अक्टूबर 2000 में वेदी पर एक स्वर्ण सर्प की कांचली प्राप्त हुई थी। जो स्वर्ण रंग जैसी प्रतीत होती है। स्थानीय लोगों की आस्था है की जब से यह स्वर्ण सर्प की कांचली मंदिर जी में मिली है उसके बाद से इस क्षेत्र पर सर्प निर्विष हो गया। यदि किसी को सांप द्वारा काट लिया जाता है तो उसकी मृत्यु नहीं होती। आज भी मंदिर जी में सर्प की कांचली को सुरक्षित रखा गया है। दूसरी कथा के अनुसार बताया जाता है की मार्च 2001 को, एक लड़के का देवबन्द मंगलौर मार्ग पर बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। वह मन में बिहारी वाले बाबा को पुकार रहा था। तभी उसे आवाज आई की कार से कूद जाओ। उस लड़के ने चलती कार से छलांग लगा दी, परन्तु ऐसा अतिशय हुआ की उस लड़के को एक खरोंच तक नहीं आई और सभी बदमाश भी वहाँ से भाग गए। अन्य कथाओं के अनुसार 7 अक्टूबर 2002 में प्रातः पूजन कक्ष में लगे नल से अचानक गर्म पानी आने लगा। इसी प्रकार दिसम्बर 2004 व मार्च 2005 में श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा का छत्र बहुत देर तक घूमता रहा जिसे सैकड़ों लोगों ने प्रत्यक्ष देखा। मई 2006 में पूजन कक्ष के नल से अचानक मीठा पानी आने लगा। स्थानीय लोगों के अनुसार समय समय पर मंदिर जी में देवों का आगमन भी होता है और मंदिर जी में रात्रि के समय गर्भ गृह से घंटियों की ध्वनि एवं किसी के द्वारा भजन कीर्तन की ध्वनियाँ भी सुनाई देती है।


सुविधाए एवं धर्मशाला

मंदिर जी में आने वाले यात्रियों एवं साधु संतो के लिए मंदिर जी में ठहरने की व्यवस्था बनी हुई है। जिसमें यहाँ पर दो कमरे है एक भोजनालय तथा साथ ही एक खुला आँगन है। जिसमें बैठकर आप ध्यान, पूजा अराधना, मंत्र का आवृत्त उच्चारण कर सकते हैं। मंदिर जी से लगभग 500 मीटर की दूरी पर श्री पार्श्वनाथ जूनियर हाई स्कूल है। जिसकी स्थापना 1997 में श्री नवीन जैन जी के द्वारा की गई। एक समय यहाँ पर 85 जैन परिवारों वाला समाज हुआ करता था। लेकिन आज यहाँ पर 3 से 4 परिवारों का समाज ही रह गया है।


मुजफ्फरनगर क्षेत्र के बारे में

मुजफ्फरनगर का क्षेत्रफल 4049 वर्ग किलोमीटर है। मुजफ्फरनगर दिल्ली से लगभग 116 किमी दूर उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग में स्थित है जिसकी सीमाएँ हरियाणा और राजस्थान से मिलती हैं। यह राष्ट्रीय राज मार्ग 58 पर सहारनपुर मण्डल के अंतर्गत गंगा और यमुना के दोआब में, दक्षिण में मेरठ और उत्तर में सहारनपुर जिलों के बीच स्थित है। यह क्षेत्र विभिन्न धार्मिक स्थलों के लिए महत्वपूर्ण है। गंगा यमुना के संगम पर बसे इस क्षेत्र में कई तीर्थ स्थल हैं जैसे कि शुक्राताल, तांदा, अंबा बारा, भिट्ठौड़ा, और मन्दीरा घाट आदि। यहाँ के त्योहार और मेले भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। इस ज़िले में कई प्राचीन राजमहल और राजा-महाराजा के महल हैं, जो ऐतिहासिक महत्व के हैं और पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। यहाँ की हिंदी और उर्दू प्रमुख भाषाएँ हैं, लेकिन अन्य भाषाएँ भी यह पर बोली जाती हैं, जैसे कि हरियाणवी और राजस्थानी।

मुजफ्फरनगर एक महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर है, चीनी, इस्पात, कागज और सिले सिलाये कपड़े और हाथ की कशीदाकारी से बने महिलाओं के सूट के लिए प्रसिद्ध है। गन्ना के साथ अनाज यहाँ के प्रमुख उत्पाद है। यहाँ की ज़्यादातर आबादी कृषि में लगी हुई है जो कि इस क्षेत्र की आबादी का 70% से अधिक है। मुजफ्फरनगर का गुड़ बाजार एशिया में सबसे बड़ा गुड़ का बाजार है। मुजफ्फरनगर में गन्ना भारत में सबसे अधिक पैदा होता है, गन्ने के मिल भी सबसे ज्यादा संख्या में मुजफ्फरनगर है।


समिति

क्षेत्र में जैन समाज न होते हुए भी मंदिर जी का संचालन मंदिर समिति द्वारा सुचारु रूप से होता है। मंदिर समिति के सदस्य इस प्रकार है

पीयूष जैन